किशनगंज, जून 20 -- किशनगंज। ग्रामीण महिला अब खेती और घर की चारदीवारी से निकलकर स्वरोजगार का नया मॉडल बन रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं दुकान, डेयरी, सिलाई, मशरूम उत्पादन और स्थानीय उत्पादों के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरकारी योजनाएं जैसे मुद्रा ऋण और स्टैंड-अप इंडिया ग्रामीण महिलाओं को बिना गारंटी के पूँजी दे रही हैं। इसका सीधा असर गांवों की अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण पर दिख रहा है। ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। किशनगंज जिला अंतर्गत दिघलबैंक प्रखंड के दिघलबैंक पंचायत की रहने वाली कल्पना देवी जीविका स्वयं सहायता समूह (चंपा समूह) से जुड़ने के बाद आर्थिक प्रगति कर दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी हैं। जीविका से जुड़ने से पहले कल्पना देवी की आर्थिक...