गिरडीह, सितम्बर 27 -- पीरटांड़। गुणायतन प्रणेता राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि धार्मिक आयोजन की सार्थकता तभी है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति की दिनचर्या, व्यवहार और जीवनशैली में दिखाई दे। केवल धार्मिक क्रियाएं कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि धर्म के प्रभाव से जीवन का क्रम बदलना चाहिए। असली धर्म वही है, जो हमारी रुटीन और जीवन जीने के तरीके में सकारात्मक परिवर्तन लाए। श्रावक संस्कार शिविर के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि दस दिनों के शिविर से श्रद्धालु बहुत कुछ लेकर जा रहे हैं। शिविर के दौरान मिले संस्कारों और सीख को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। यह भी पढ़ें- जैन मंदिर में अभिषेक शांतिधारा व महापारणा कार्यक्रम का आयोजन उन्होंने प्रत्येक श्रद्धालु से अपनी श्रद्धा, शक्ति और भावना के अनुरू...