हापुड़, अप्रैल 6 -- श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कसेरठ बाजार में जैन भक्तो को दिगम्बर जैन मुनि श्री 108 शुभ चन्द्र सागर महाराज ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में 24 तीर्थकर हुए है। जिन्होंने जीवन मे तप,संयम, साधना के मार्ग को अपनाने पर बल दिया। जैन धर्म का सबसे बडा तीर्थ सम्मेद शिखर झारखंड में है। जहां पर जैन तीर्थकरो ने घोर तप, साधना की। जैन धर्म के 20 तीर्थकर सम्मेद शिखर से ही मोक्ष गये हैं।उन्होंने कहा कि आत्म कल्याण, मन की शान्ति, जीवन मे संतोष, मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होने के लिए गृहस्थ को तप, त्याग, दान, सेवा, संयम को अपनाना चाहिए। धर्म का मार्ग ही मनुष्य को आत्मसंतोष, शान्ति तथा स्थायी सुख देता है। मनुष्य नासमझी के कारण भौतिक वस्तुओ मे सुख खोजता है, किन्तु उसे दुख, असंतोष मिलता है। क्योकि भौतिक सुख सुविधाओ मे सच्चा सुख...