जीवन जीने की कला है श्रीमद भागवत: स्वामी चिदानंद
रिषिकेष, मई 12 -- परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला है। जब संतों की वाणी गंगा के तट पर गूंजती है, तो युगों-युगों की चेतना जागृत होती है। मंगलवार को परमार्थ निकेतन में कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कथा वाचक रमेश भाई ओझा को सम्मानित कर विदा किया। उन्होंने कहा कि गुजरात के रहने वाले संत रमेश भाई ओझा बीते सात दिनों से परमार्थ निकेतन में कथा सुना रहे थे। उनकी वाणी ने सभी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और जीवन को सेवा, साधना एवं संस्कारों से जोड़ने की प्रेरणा दी। कथा के प्रत्येक प्रसंग ने श्रद्धालुओं के अंतर्मन में शांति, संतुलन और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव जागृत करने में मदद की है। रमेश भाई ओझा ने कहा कि कथा केवल धार...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.