वाराणसी, जनवरी 22 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। श्रीमद्भागवत सिर्फ एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह कला हर जाति-धर्म के लोगों का कल्याण करती है। मोक्ष तक पहुंचाती है। ये विचार भागवत प्रवक्ता आचार्य तुंगनाथ त्रिपाठी के हैं। वह करौंदी स्थित महामना नगर कॉलोनी में हो रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। यह पापों का नाश कर सकती है। इससे व्यक्ति जीवन में सब कुछ प्राप्त कर सकता है। वह मनुष्य बहुत ही अभागा है जिसके जीवन में ईश्वर भक्ति नहीं है। गलतियों का प्रायश्चित करना आवश्यक है। सत्य का ध्यान करना और भगवान के प्रति समर्पण ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। कथा श्रवण से मन को शांति और आध्यात्मिक विकास मिलता है। यह जीवन में सुख-समृद्धि...