शामली, फरवरी 26 -- शहर के जैन धर्मशाला में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में श्री 108 प्रतीक सागर मुनिराज ने सत्यमेव जयते के अर्थ और उसके जीवन में महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्यमेव जयते वाक्य मुण्डक उपनिषद से लिया गया है, जिसका अर्थ है सत्य की ही सदैव विजय होती है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला सिद्धांत है। सत्य को अपनाने के लिए मन का भयमुक्त होना आवश्यक है। जब तक व्यक्ति डर के अधीन रहता है, वह सत्य के मार्ग पर दृढ़ता से नहीं चल सकता। मुनिराज ने कहा कि भय का प्रभाव शरीर से अधिक मन पर पड़ता है। बाहरी खतरा जीवन को एक बार समाप्त कर सकता है, लेकिन मन में बैठा डर व्यक्ति को प्रतिदिन भीतर से कमजोर करता रहता है। जो व्यक्ति भयभीत है, वह निर्भीक होकर सत्य नहीं बोल सकता। इसलिए सत्य का मार्ग निडरता की मांग करत...