सिद्धार्थ, जनवरी 9 -- बयारा, हिन्दुस्तान संवाद। सत्संग जीवन को निर्मल और पवित्र बनाता है। यह मन के गलत विचारों व पापों को दूर करता है। दिशाओं में मान-सम्मान बढ़ाती है। मानव सत्संग से सुधरता है और कुसंग से बिगड़ता है। ये बातें क्षेत्र के देईपार गांव में चल रही रामकथा में गुरुवार को कथावाचक कृपा सिंधु ने कहीं। कथावाचक ने कहा कि जीवन के दोषों को दूर करने के लिए सत्संग करते हैं। प्रात:काल का भोजन सायंकाल तक और सायंकाल का भोजन रात भर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। ऐसे ही सुबह किया हुआ सत्संग पूरे दिन हमें अधर्म और पाप से बचाए रखता है। शाम का सत्संग हमें कुत्सित विचारों से बचाता है। उन्होंने कहा कि जब मन में काम, क्रोध रूपी वासनाओं की आंधी उठे और ज्ञान रूपी दीपक बुझने लगे तो ऐसे में सत्संग औषधि का कार्य करता है। उन्होंने राम विवाह की भी कथा सुनाई...