ललितपुर, मार्च 18 -- हम सभी को ऐसा कार्य करना चाहिए, जो दुनिया और धर्म के काम आए। हम भगवान के चरणों में देने योग्य बनें। कभी ऐसी नौबत न आए कि हमको अपने पिता की वसीयत लेनी पड़े। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए तीर्थ चक्रवर्ती श्रमण मुनिश्री सुधासागर महाराज ने यह बात कही। मुनिश्री ने कहा हम कि दुनिया की हम शक्ति समझते हैं, अपनी नहीं। जीवन में वह कार्य नहीं करना, जिसको करने से डर लगे, जिसको धर्म और गुरु रोकते हों। उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता का अभिशाप कभी नहीं लेना। धर्म ही जीवन में श्रेष्ठ है, इसको समझो और अपने जीवन में उतारो। यह नर जन्म मिला है, जिसको सार्थक करो। इसी में कल्याण है। मुनिश्री ने कहा कि धर्म ही एक ऐसा सहारा है, जहां व्यक्ति को अच्छे बुरे का ज्ञान रहता है और पापों से ब...