गिरडीह, सितम्बर 9 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। गुणायतन साधनारत मुनि प्रमाण सागर महाराज के मंगल सानिध्य में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में मध्यप्रदेश से पहुंचे करीब 200 श्रावक भक्ति की गंगा में डूबकी लगा रहे है। आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना की जा रही है। श्रद्धालु भक्ति भावना व मुनि श्री के प्रवचन को आत्मसात करने में जुटे है। इस अवसर पर राष्ट्रसंत मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को त्याग, दान, उदारता और आत्मशुद्धि का महत्व समझाया। मुनिश्री ने कहा कि संसार मे जो व्यक्ति जोड़ता है, वह एक दिन छूट ही जाता है, लेकिन जो स्वेच्छा से छोड़ा है, वही हमारे संस्कार, व्यक्तित्व और आत्मिक विकास के साथ आगे बढ़ता है। इसलिए जीवन की वास्तविक उपलब्धि संग्रह में नहीं, बल्कि त्याग में है। उन्होंने कहा कि मनुष्य चौबीस घंटे इस बात पर विचार करता...