पटना, दिसम्बर 14 -- ज्ञान भवन में तीन दिनों से चल रहे सांस से संबंधित बीमारयों का वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस नैपकॉन 2025 का रविवार को समापन हो गया। आखिरी दिन फेफड़े की बीमारियों की पहचान और इलाज को लेकर आई नई तकनीकों पर मंथन किया गया। आयोजन सचिव डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि वायु प्रदूषण, धूम्रपान, तंबाकू सेवन, असुरक्षित कार्यस्थल और जीवनशैली में आए बदलाव फेफड़ों के रोगों के प्रमुख कारण बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को केवल नए शोधों से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर रोग रोकथाम और बेहतर प्रबंधन के लिए तैयार करना रहा। फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच, स्पाइरोमेट्री और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों पर चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि सही जांच से ही सही इलाज संभव है। डॉ. प्रणय विनोद ने कहा कि सही इनहेलर तकनीक, नियमित फॉलोअप और मरीजों को...