जिस व्यक्ति में करुणा, सद्भावना व अहिंसा का भाव, वही सच्चे मानव: मुनिश्री
अररिया, मई 26 -- फारबिसगंज, एक संवाददाता। आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमारजी एवं मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ भवन में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति रही। दोनों संतों ने अध्यात्म, संयम, त्याग एवं मानवीय मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रवचन को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा कि चिंतामणि रत्न, कामधेनु एवं कल्पवृक्ष को दुर्लभ माना गया है, लेकिन आगम सूत्रों में मानव जीवन को सबसे दुर्लभ बताया गया है। उन्होंने कहा कि केवल मनुष्य जन्म लेना बड़ी बात नहीं, बल्कि भीतर मानवीय चेतना का जागृत होना आवश्यक है। जिस व्यक्ति में करुणा, सद्भावना और अहिंसा का भाव रहता है, वही सच्चे अर्थों में मानव कहलाने योग्य होता है। यह भी पढ़ें- जिस व्यक्ति में करुणा, सद्भावन...
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