नई दिल्ली, जून 29 -- दुनिया भर में अरबों लोगों के लिए चावल सिर्फ रोजाना का भोजन नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और लाखों किसानों की आजीविका का अहम आधार है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के करोड़ों लोग इसे अपना मुख्य आहार मानते हैं। लेकिन एक ताजा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने गंभीर चेतावनी जारी की है कि वर्तमान चावल उत्पादन पद्धतियां पृथ्वी की पर्यावरणीय सहनशक्ति को पार कर चुकी हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि आधुनिक धान की खेती अब ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, मीठे पानी के अत्यधिक दोहन और पोषक तत्व प्रदूषण की सबसे बड़ी वजहों में शामिल हो गई है। इस अध्ययन का शीर्षक है 'क्या हम अपने ग्रह को नुकसान पहुंचाए बिना चावल का उत्पादन कर सकते हैं?' इसमें प्लेनेटरी बाउंड्रीज फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया गया है, जिसे स्टॉकहोम रेजिलिएंस सेंटर के वैज्ञ...