संतकबीरनगर, अप्रैल 12 -- संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में किसान पशुपालन विभाग की योजनाओं को दर किनार कर पशुपालन से मुंह मोड़ रहे हैं। पांच सालों में जिले में पशुओं की तादाद में एक लाख की कमी आई है। यह जिले के किसानों के साथ-साथ विभाग के लिए चिंताजनक हैं। जिस पशुपालन विभाग के चिकित्सक और पैरामडिकल स्टाफ को हर माह एक करोड़ से अधिक वेतन दिया जा रहा है, उस विभाग में पशुओं की तादाद में तेजी के साथ कमी आ रही है। गाय और भैंसपालन को पशुधन की श्रेणी में रखा जाता है। किसानों के लिए ये अमूल्य धन होते हैं। किसानों का इन जानवरों से लगाव हो जाता है। पशुओं के दूध से किसानों की आय में इजाफा होता है। गोबर से खेत की उर्वरा शक्ति सुधरती है। यह बात किसान बखूबी जानता है फिर भी किसान पशुपालन से मुंह मोड़ रहे हैं। बीते पांच सालों में पशुपालन के ...