बलिया, मार्च 8 -- बलिया, संवाददाता। जिले के करीब 45 फीसदी दुधारू मवेशी किलनी (प्रोटोजोअल) से ग्रसित हैं। खासकर विदेशी नस्ल की गाय भैंस इससे सर्वाधिक प्रभावित नजर आ रही हैं। यह मवेशियों का खून चूसती हैं, जिससे पशु कमजोर होने के साथ ही अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाती है। ऐसे में अगर पशुपालक उचित उपचार नहीं करा सके तो उन्हें असमय पशुधन हानि सहनी पड़ सकती है। डॉ. दिग्विजय सिंह ने पशुपालकों को सलाह दिया है कि वह बिना विशेषज्ञ के परामर्श के किसी प्रकार की दवा न लगाएं। उन्होंने पशुपालकों को बताया है कि मवेशियों के रहने वाले स्थान की विशेष रूप से सफाई करें, साथ ही किलनी से पीड़ित मवेशियों से अन्य मवेशियों को अलग रखने का इंतजाम करें। डॉक्टर की सलाह पर पाउडर से पशुओं की धुलाई करें, इससे भी अगर समस्या खत्म नहीं हो रही है तो वह मोबाइल वेटनरी यूनिट ...