दरभंगा, अगस्त 15 -- विजय कुमार ठाकुर,जाले। 'कहानियां ही बची हैं अब उनकी शहादत की, दिलों में अब वो कद्र-ए-वतन दिखाई नहीं देती।' 1942 की अगस्त क्रांति में आजादी का बिगुल बजाने के साथ दो-दो शहादत देने वाले दरभंगा जिले की एकमात्र रतनपुर पंचायत की पिछले 84 वर्षों से उपेक्षा बदस्तूर जारी है। भारत को आजाद हुए 79 वर्ष बीत गए, पर अब तक न तो अगस्त क्रांति में शहीद हुए प्रदीप शर्मा और मो. बिलट दर्जी के परिजनों को पेंशन का लाभ दिया गया, न ही उनके परिवारों को कोई आर्थिक सहायता दी गई और न ही उनकी स्मृतियों को संजोने की दिशा में सरकार की ओर से कोई ठोस योजना बनाई गई। यह भी पढ़ें- आज फटेहाल जीवन जी रहे आजादी के दीवाने कमलानंद का परिवार आज भी दोनों शहीदों के परिवार के सदस्य मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। महात्मा गांधी के आह्वान पर नौ अगस्त 1942 को कमतौल स...