नई दिल्ली, मई 20 -- सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना कराने संबंधी केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी और कहा कि यह मुद्दा नीतिगत दायरे में आता है। अदालत ने कहा कि सरकार को कल्याणकारी उपाय करने के लिए पिछड़ी जातियों से संबंधित व्यक्तियों की संख्या जानना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता सुधाकर गुम्मुला की दलीलों से असहमति जताई। गुम्मुला दलीलें पेश करने के लिए खुद उपस्थित थे और उन्होंने कहा कि सरकार के पास जातिगत विवरणों से संबंधित पर्याप्त जानकारी और आंकड़े उपलब्ध हैं। यह भी पढ़ें- बंगाल में बदला OBC आरक्षण का गणित, 66 जातियां फिर हुईं बहाल; मुस्लिम समुदायों को बड़ा झटका सीजेआई ने जनहित याचिका खारिज करते...