नई दिल्ली, मई 4 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। राजधानी में बढ़ रहे प्रदूषण के साथ सांसों पर संकट भी गहराने लगा है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते 10 साल पहले की तुलना में सांस की बीमारी से मरने वालों की संख्या में 47 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। इसमें भी चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। डॉक्टर इसकी वजह एलर्जी, संक्रमण और प्रदूषण को बता रहे हैं। सांख्यिकी निदेशालय और मुख्य रजिस्ट्रार कार्यालय की मृत्यु पंजीकरण की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में सांस की बीमारियों से 6239 मरीजों की मौत हुई थी। डॉक्टरों ने इन मरीजों की मौत का करण सांस की बीमारी बताया था। इनमें से 112 मरीजों की मौत का कारण अस्थमा को बताया गया। इसमें 14 वर्ष से कम उम्र के ज्यादा बच्चे शामिल नहीं थे, क्योंकि अस्थमा से बुजुर्ग अधिक पीड़ित होते हैं। वहीं,...