जल में रह कर मगर से यारी: अरविंद अंशुमान
धनबाद, मार्च 23 -- जल में रह कर मगर से यारी, नहीं तो कुछ नहीं, बन सको जो आप दरबारी। जाने माने साहित्यकार अरविंद अंशुमान ने जैसे ही मंच पर स्वरचित काव्य की इन पंक्तियों का पाठ शुरू किया, तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सीसीडब्लयूओ क्लब गूंज उठा। मौका था भारतीय साहित्यकार परिषद धनबाद के तृतीय स्थापना दिवस समारोह का। रविवार को आयोजित इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अरविंद अंशुमान समेत 25 साहित्यकारों ने स्वरचित कविता का पाठ किया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की तस्वीर पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद डॉ संगीतानाथ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष के रूप में उपस्थित प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार अरविंद अंशुमान सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए रंजन कुमार श्रीवास्त...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.