नवादा, अप्रैल 29 -- नवादा जिला वर्तमान एक गंभीर जल और कृषि संकट के मुहाने पर खड़ा है। एक तरफ प्रकृति की बेरुखी और दूसरी तरफ प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी ने यहां के किसानों को दाने-दाने को मोहताज कर दिया है। सुखाड़ अब नवादा की नियति बनती जा रही है, और विडंबना यह है कि पारम्परिक जल संचयन प्रणालियों के ध्वस्त होने के बावजूद आधुनिक विकल्पों पर काम हो ही नहीं पा रहा है। ​नवादा का एक बड़ा हिस्सा, विशेषकर रजौली, अकबरपुर, कौआकोल समेत गोविंदपुर, सिरदला और मेसकौर जैसे प्रखंड गिरते भू-जल स्तर से बुरी तरह प्रभावित हैं। पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले के कई क्षेत्रों में वाटर टेबल 10 से 15 फीट तक नीचे चला गया है। जिला कृषि विभाग के एक अनुमान के मुताबिक, नवादा में लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, लेकिन सिंचाई सुविधाओं के अभाव में खरी...