देहरादून, जुलाई 3 -- श्रीनगर, संवाददाता। हिमालयी क्षेत्रों की पारंपरिक कृषि पर जलवायु परिवर्तन का असर अब वैज्ञानिक शोध में भी स्पष्ट रूप से सामने आने लगा है। यह भी पढ़ें- सूखे से सैलाब तक का खतरनाक ट्रेंड: क्यों हिमालयी राज्यों में बढ़ रही तबाही, एक्सपर्ट्स को किस बात का डरअध्ययन का विवरण हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादक कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) द्वारा रुद्रप्रयाग जनपद के उखीमठ विकासखंड के नौ गांवों में किए गए विस्तृत अध्ययन में खुलासा हुआ है कि बदलती जलवायु, मिट्टी की घटती उर्वरता और पोषक तत्वों के असंतुलन के कारण पारंपरिक खेती लगातार कमजोर होती जा रही है। अध्ययन में पिछले दो दशकों के दौरान धान, गेहूं, जौ और मंडुवा जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्...