भभुआ, अप्रैल 11 -- ठंढ़ में खुली जगह पर धान की रखवाली करने में कांप जाते है किसान, व्यापारी व मिलर से कम मिलती है उपज की कीमत बेमौसम बारिश से डूब जाती है फसल, पहाड़ी क्षेत्र में सुखाड़ देता है किसानों को तखलीफ किसानों को उपज बेचने के लिए झेलनी पड़ती है जलालत, बिचौलिए से बेचना मजबूरी ग्राफिक्स 1.41 लाख हेक्टेयर में कैमूर जिले में होती है धान की रोपनी 1.04 लाख हेक्टेयर में गेंहू की खेती के लिए निर्धारित है लक्ष्य (पटना का टास्क) भभुआ, हिन्दुस्तान संवाददाता। जलवायु परिवर्तन के इसदौर में खेती की लागत व मेहनत दोनों बढ़ गई है, जबकि किसानों का मुनाफा घट गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा, सूखा, भीषण गर्मी, कीटों के प्रकोप से फसलों की उपज में गिरावट आई है। कृषि विभाग की माने तो कुछ वर्षों में प्रमुख फसलों की उपज में 7-8% की गिरावट आ सकती है...
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