नई दिल्ली, मई 20 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारत समेत दुनिया में लाखों लोग बेघर हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन से जुड़ी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि घरों, भवनों का निर्माण जलवायु खतरों को ध्यान में रखकर नहीं किया गया तो आने वाले समय में ऊर्जा की खपत में वृद्धि हो सकती है। इससे भवनों से होने वाले उत्सर्जन में भी वृद्धि हो जाएगी। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में वैश्विक उत्सर्जन में 37 फीसदी की हिस्सेदारी इमारतों की है। इसमें आवासीय और व्यावसायिक दोनों शामिल हैं। पिछले दस सालों के दौरान इसमें मामूली बदलाव देखने को मिला है। निर्माण गतिविधियां बढ़ने के बावजूद कार्बन उत्सर्जन की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। यानी पहले की तुलना में कम उत्सर्जन करके अब निर्माण हो रहे हैं लेकिन यह बदलाव सीमित है。

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