जामताड़ा, जून 17 -- ​कभी सैलानियों और स्थानीय निवासियों से गुलजार रहने वाला यह बोटिंग डैम चित्तरंजन के प्रमुख राजस्व स्रोतों में से एक हुआ करता था। रोजाना दर्जनों परिवार, बच्चे और युवा यहां बोटिंग का आनंद लेने आते थे, जिससे अच्छी-खासी आमदनी होती थी। लेकिन जलकुंभी की सफाई न होने के कारण बोटिंग बंद है, जिससे रेलवे को हर महीने भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह भी पढ़ें- यात्री प्रतीक्षालय बने खंडहर, प्रशासन बेखबरपर्यटन स्थल बना चारागाह, बढ़ रहा बीमारियों का खतरा: ​जलकुंभी के इस जाल ने न सिर्फ डैम की खूबसूरती को निगल लिया है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। रुके हुए पानी और जलकुंभी के कारण मच्छरों का डंक बढ़ गया है, जिससे आस-पास के इलाकों में मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।असामाजिक तत्वों क...