फतेहपुर, जुलाई 13 -- दोआबा के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। विभिन्न विकास खंडों में कई विद्यालयों की इमारतें वर्षों पहले जर्जर और निस्प्रयोज्य घोषित हो चुकी हैं, लेकिन उनका ध्वस्तीकरण और नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। बारिश के मौसम में टपकती छतें, दरकती दीवारें और कमजोर छज्जे किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते मासूम बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा लगातार दांव पर लगी हुई है। सोमवार को ऐसे ही विद्यालयों की पड़ताल की गई तो हकीकत उजागर हुई। प्रस्तुत है 'हिन्दुस्तान' द्वारा की गई पड़ताल पर संक्षिप्त रिपोर्ट......... जर्जर भवन में बैठ शिक्षा ग्रहण करते बच्चे

खखरेरु की स्थिति खखरेरु।...