नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश में कहा कि 'बेहद जरूरी मामले' जिस पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया का इंतजार नहीं कर सकते हैं, का उल्लेख सिर्फ सीजेआई के समक्ष ही किया जाना चाहिए। आम तौर पर सीजेआई के उपलब्ध नहीं होने या किसी संविधान पीठ की अध्यक्षता करने में व्यस्त होते हैं, तो जरूरी मामलों को सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज के समक्ष उल्लेख किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6 अप्रैल को जारी एक परिपत्र में कहा गया कि बेहद जरूरी मामलों को पेश करने की अनुमति कोर्ट नंबर 1 के सामने है, ऐसे मामले जो 29 नवंबर, 2025 के सर्कुलर के मुताबिक, जिसमें कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध होने का इंतजार नहीं कर सकते, भले ही सीजेआई किसी संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे हों। इसमें कहा ग...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.