नई दिल्ली, जून 28 -- नई दिल्ली। देश में सैनिक स्कूलों की संख्या बढ़ाई जा रही है लेकिन इनको लेकर सरकार की सोच भी बदल रही है। सरकार का कहना है कि सैनिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे जरूरी नहीं कि एनडीए की ही तैयारी करें, फौंज में ही जाएं। वह कोई भी करियर चुन सकते हैं। जरूरी यह है कि वह सैन्य अनुशासन को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। आजादी के बाद 60 के दशक में देश में सैनिक स्कूलों की स्थापना का सिलसिला शुरू हुआ था। तब असली मकसद यही था कि यहां से पढ़ने वाले बच्चे रक्षा अकादमी (एनडीए) के लिए तैयारी करें और सेनाओं को योग्य अफसर मिल सकें। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा समय में देश के 23 राज्यों में 33 सैनिक स्कूल संचालित हैं, जिनमें करीब 20 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। इन स्कूलों में अब लड़कियों की भी एंट्री हो चुकी है। 100 सैनिक स्कूल निजी भागीदारी में ...