रामपुर, अप्रैल 13 -- रामपुर। जिला कारागार में सलाखों के पीछे बंदी सही-गलत कर्मों का पाठ पढ़ रहे हैं। पुराणों से नाता जोड़ रहे बंदियों के बीच सुख सागर, शिव पुराण, विष्णु पुराण की सबसे अधिक मांग है। पुराणों के बाद सबसे अधिक रामायण और फिर श्रीमद्भागवत गीता की मांग है। वहीं, उपन्यासों में धर्मवीर भारती और साहित्य-कहानियों में मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं को पढ़ने में बंदी रुचि दिखा रहे हैं। जिला जेल अधीक्षक राजेश यादव के अनुसार, बंदी जब जेल में आते हैं। शुरुआत में उनका मन विचलित होता है। बंदियों का मानसिक परीक्षण भी नियमित रूप से कराया जाता है। पुराण-गीता पढ़ने वाले बंदियों में अचंभित करने वाले परिणाम आते हैं। यह भी पढ़ें- पांडुलिपि हस्तलिखित ग्रन्थों का वेबसाइट पर उन्होंने बताया कि काउंसलिंग से अधिक कारगर किताबें साबित हो रही हैं जिन बंदियों ने पुर...