नई दिल्ली, जनवरी 3 -- तकनीक की तेज़ रफ्तार, बाजार की बढ़ती भूख और अंतहीन प्रतिस्पर्धा के इस दौर में इंसान भौतिक रूप से आगे बढ़ता दिख रहा है, लेकिन भीतर से असंतुलन, तनाव और खालीपन भी गहराता जा रहा है। ऊंची इमारतें खड़ी हो रही हैं, GDP के आंकड़े लगातार ऊपर जा रहे हैं, मगर सवाल यह है कि क्या यह विकास मनुष्य को सच में सुखी और संतुलित बना पा रहा है? इसी बुनियादी सवाल से जन्म हुआ है पुरुषार्थिक मॉडल ऑफ होलिस्टिक डेवलपमेंट, जिसे जयपुर में 92 वर्षीय वरिष्ठ प्रोफेसर और चिंतक डॉ. आनंद कश्यप ने विकसित किया है। डॉ. कश्यप का यह मॉडल भारतीय दर्शन की प्राचीन अवधारणा-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष-चार पुरुषार्थों पर आधारित है, लेकिन इसे वे केवल आध्यात्मिक उपदेश तक सीमित नहीं रखते। उनके अनुसार, ये पुरुषार्थ मानव जीवन के ऐसे वैज्ञानिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आध...