नई दिल्ली, सितम्बर 15 -- जयपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों में भाजपा के बहुमत और कांग्रेस की हार-जीत के बीच एक ऐसी कहानी भी छिपी है, जो आने वाले दिनों की स्थानीय राजनीति का मिजाज समझने के लिए काफी अहम है। यह कहानी है निर्दलीय पार्षदों की। पहली नजर में देखें तो 2020 के मुकाबले 2026 में निर्दलीयों की संख्या घट गई है, लेकिन वार्डों की संख्या के अनुपात में तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है। 100 वार्ड कम होने के बावजूद निर्दलीयों की हिस्सेदारी करीब 9.2 फीसदी से बढ़कर लगभग 10 फीसदी हो गई है।250 वार्ड से 150 हुए, निर्दलीय सिर्फ 8 घटे 2020 में जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम के कुल 250 वार्ड थे। इनमें 23 निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर पार्षद बने थे। इस लिहाज से निर्दलीयों की हिस्सेदारी करीब 9.2 फीसदी थी। 2026 में परिसीमन के बाद दोनों निगमों को मिलाकर एकीक...