भागलपुर, मार्च 29 -- जमुई। यूं ही ग्रीन ट्रिब्यूनल की अड़चन से बालू की किल्लत पैदा नहीं हुई थी। इसके लिए शायद बंदोबस्त धारी ही जिम्मेदार होते हैं। इसकी बानगी एक बार फिर से जमुई के विभिन्न बालू घाटों पर दिख रही है। यहां बंदोबस्तधारी पर्यावरण की छाती पर डोजर चला रहे हैं, यह कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मजेदार बात तो यह है कि इन सब के बावजूद जिला प्रशासन मूक दर्शक बना है। इसके पीछे की वजह क्या है यह तो जिला प्रशासन और बंदोबस्तधारी ही जाने। लेकिन, जमुई की जनता खासकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के मन में सवाल उठने लगा है। वैसे खनन विभाग के अधिकारी नदियों में पोकलेन से बालू उठाव को जायज मानते हैं। हालांकि वह भी इस कार्य में मजदूरों को प्राथमिकता देने की नियमावली से सहमत हैं लेकिन सवाल भी वहीं खड़ा करते हैं। खान निरी...