भागलपुर, जनवरी 23 -- जमुई। भक्ति वह अवस्था है , जो जीवन को दिव्यता और आनंद से भर देती है। यह न इच्छाओं का सौदा है न स्वार्थ का माध्यम। सच्ची भक्ति का अर्थ है परमात्मा से गहरा जुड़ाव और निःस्वार्थ प्रेम।संत निरंकारी मंडल के केंद्रीय प्रचारक सतीश चंद्र दुबे ने श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम में आयोजित सत्संग में भक्ति की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रह्मज्ञान भक्ति का आधार है। यह जीवन को उत्सव बना देता है। भक्ति का वास्तविक स्वरूप दिखावे से परे और स्वार्थ व लालच से मुक्त होना चाहिए। जैसे दूध में नींबू डालने से वह फट जाता है , वैसे ही भक्ति में लालच और स्वार्थ हो तो वह अपनी पवित्रता खो देती है। केंद्रीय प्रचारक ने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान हनुमान जी , मीराबाई और बुद्ध भगवान का भक्ति स्वरूप भले ही अलग था , लेकिन उनका मर्म एक ही था-परमात्मा से...