गिरडीह, जून 26 -- जमुआ, प्रतिनिधि। आषाढ़ का महीना आने में मात्र तीन दिन ही बाकी रह गए हैं और जमुआ प्रखंड क्षेत्र के खेतों में हलचल तो बढ़ी है, लेकिन किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। क्षेत्र में धान के बिचड़े (पौध) अब पूरी तरह तैयार हो चुके हैं और अगले कुछ दिनों में ये खेतों में रोपे जाने के लायक हो जाएंगे। हालांकि, पर्याप्त मानसूनी बारिश न होने के कारण मुख्य खेतों में धान की रोपनी का काम पूरी तरह ठप है। जमुआ प्रखंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां के करीब 90 प्रतिशत किसान पूरी तरह से पारंपरिक रूप से सिर्फ बारिश के पानी पर ही निर्भर हैं। सिंचाई के पुख्ता इंतजाम नहीं, किसान बेबस यह भी पढ़ें- मानसून की आसा छोड़ ,धान रोपने की तैयारी में जुटे किसानसिंचाई के साधनों की कमी प्रखंड क्षेत्र में सरकारी सिंचाई योजनाएं धरातल पर...