गिरडीह, जून 2 -- ​जमुआ, प्रतिनिधि। सरकार एक तरफ जहां पशुपालन को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुनी करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलटा है। जमुआ प्रखंड मुख्यालय स्थित पशुपालन कार्यालय इसका जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यह कार्यालय अब किसानों के लिए उम्मीद नहीं, बल्कि मायूसी का पता बन गया है। आलम यह है कि कार्यालय में ताला लटका रहना अब आम बात हो चुकी है, जिसके कारण बीमार गाय-भैंस तड़पने को मजबूर हैं और गरीब किसान इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। ​

पशुपालन कार्यालय की वास्तविकता कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है- गाय-भैंस के गर्भाधान और गर्भ जांच की सुविधा उपलब्ध। लेकिन हकीकत यह है कि यह बोर्ड महज एक शो-पीस बनकर रह गया है। कार्यालय के भीतर दवाएं आलमारियों की शोभा बढ़ा रही हैं, लेकिन सुदूर गांवों से...