गिरडीह, अप्रैल 14 -- सियाटांड़/गिरिडीह, हिटी। जमुआ में मनरेगा योजना में कथित तौर पर 3.5 करोड़ रुपए का घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। भेंडरों के खाते में गई राशि का पंचायत व प्रखंड के अधिकारियों ने आपस में बंटवारा कर लिया है। जिसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी संदिग्ध है। मनरेगा के मैटेरियल योजना में इस बड़े घोटाले की चर्चा प्रखंड के हर चौक-चौराहे पर अब आम हो गयी है। इससे प्रखंड प्रशासन के प्रति लाभुकों, आमजनों व समाजसेवियों का ग़ुस्सा सोशल मीडिया पर फूट रहा है जो कभी भी धरातल पर दिख सकता है। एक तो सरकार द्वारा संपूर्ण मांग 12 करोड़ के विरुद्ध जहां 3.5 करोड़ भुगतान किया गया। यह भी पढ़ें- प्रशासनिक लापरवाही से अधूरी पड़ी योजनाएं, वर्षों बाद भी नहीं हुई कार्रवाई उस पर भी भ्रष्टाचारियों की गिद्ध नज़र लग गई। इससे लाभुकों का ग़ुस्सा जायज है...