नई दिल्ली, फरवरी 10 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को जमानत या अग्रिम जमानत देने के लिए पैसे जमा कराने की शर्त नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि तथ्यों पर विचार करने के जमानत/अग्रिम जमानत बनती है तो अदालत को आगे बढ़ना चाहिए, न कि जमानत देने के लिए पैसे जमा कराने की शर्त लगानी चाहिए। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने धोखाधड़ी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी पिता-पुत्र को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। पीठ ने आदेश दिया है कि मामले में गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि इस अदालत के स्पष्ट निर्द...