जमशेदपुर, जुलाई 10 -- आनुवांशिक बीमारी बच्चों को न हो, इसको लेकर लोग जागरूक हो रहे हैं। लोग अब जेनेटिक टेस्टिंग के बाद परिवार नियोजन पर ध्यान दे रहे हैं। पहले जहां विवाह से पहले कुंडली मिलान पर अधिक जोर दिया जाता था, वहीं अब मेडिकल हिस्ट्री और जेनेटिक (आनुवांशिक) जांच को भी उतना ही महत्व दिया जाने लगा है। खासकर ऐसे परिवार, जिनमें हृदय रोग, किडनी की बीमारी, थैलेसीमिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया या अन्य अनुवांशिक बीमारियों का इतिहास है। ऐसे लोग पहले अपनी जेनेटिक जांच करा रहे हैं। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह के आधार पर संतान की योजना बना रहे हैं। किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि जमशेदपुर में भी जेनेटिक टेस्टिंग की मांग कुछ समय में बढ़ी है। यह भी पढ़ें- Khagaria News: गोगरी: शिविर में 158 गर्भवती महिलाओं की हुई जांच, दी सलाह न...