जब हर बेंत पर 'रेनुआ' के मुंह से आह के बदले निकला था वन्दे मातरम
अररिया, अगस्त 13 -- फुलेन्द्र कुमार मल्लिक अररिया, वरीय संवाददाता। यह भी पढ़ें- जरा याद करो कुर्बानी: नगर कोतवाली में 13 अगस्त 1929 को बापू ने फहराया था तिरंगा बात यही 1930-31 की होगी। उस समय आज़ादी के लिए देश में आंधी चल रही थी। ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के विरूद्ध महात्मा गांधी का सविनय अवज्ञा आंदोलन परवान पर था। इसी तेज आंदोलन के हवा के बीच सांस लेकर अररिया औराही हिंगना के रेनुआ यानी फणीश्वर नाथ रेणु भी बड़े हो रहे थे। वे भी आज़ादी के लिए कुछ भी करने का तैयार थे। रेणु के पिता शीला नाथ मंडल सहित उनका पूरा परिवार न केवल ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ थे बल्कि अंग्रेज विरोधी साहित्य पढ़ने के भी शौकीन थे। बालक रेनुआ भी इसमें शामिल था। हालांकि उस समय उसकी उम्र महज नौ साल के आसपास होगी। यह भी पढ़ें- अपनी कलम की पैनी धार से अंग्रेजों पर वार करत...
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