गंगापार, अगस्त 14 -- 1923 में नमक सत्याग्रह की शुरुआत के बाद कोरांव की माटी ने दर्जनों ऐसे लाल पैदा किए जिन्होंने आजादी की भूख लेकर अंग्रेजों से लोहा लिया, यातनाएं सही और कई बार जेल गए लेकिन जब तक आजादी का नारा बुलंद करते हुए ध्वजारोहण नहीं कर लिया,तब तक चैन से नहीं बैठे। 1947 की बेचैन करने देने वाली उस रात ने ऐसा बिगुल बजाया की अंग्रेजों के साथ-साथ कोरांव और आसपास के पास बाशिंदों की जमीन कांप गयी। सभी सहम गए कि अब भारी कहर मचने वाली है लेकिन जैसे ही सुबह हुआ कभी क्षेत्र का एकमात्र मिडिल स्कूल आज बीआरसी बने परिसर में ध्वजारोहण देख सभी प्रफुल्लित हो उठे। वह स्थल आज भी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की कहानी बयां कर रहा है। यह भी पढ़ें- आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे रघुनाथपुर के स्वतंत्रता सेनानीअन्य स्वतंत्रता सेनानियों का योग...