नई दिल्ली, जुलाई 8 -- आज भले ही सैटेलाइट और सुपरकंप्यूटर मौसम का हाल बताते हैं, लेकिन बरसों से हमारे देश के किसान आसमान की हर हलचल को अपनी आंखों से पढ़कर जान जाते थे कि बारिश कब होगी। यह कोई अंधविश्वास या हवा-हवाई बातें नहीं थीं, बल्कि पीढ़ियों के अनुभव और वैज्ञानिक समझ पर टिका एक मजबूत सिस्टम था, जो सदियों से लिखित रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा। तो आइए जानते हैं कि बिना किसी आधुनिक तकनीक के, हमारे बुजुर्ग बारिश का अंदाजा कैसे लगाते थे।नक्षत्रों की चाल और पंचांग का गणित भारत में बारिश का अंदाजा लगाने का सबसे पुराना तरीका खगोल विज्ञान से जुड़ा रहा है। प्राचीन ग्रंथ 'वेदांग ज्योतिष' ने उस हिंदू पंचांग की नींव रखी, जिसे आज भी देश के बड़े हिस्से में लोग देखते हैं। सूरज, चांद और तारों की चाल को ट्रैक करके हमारे पूर्वज यह पहले ...