रांची, जुलाई 10 -- रांची, विशेष संवाददाता। शादी के महज ढाई महीने बाद बिखरे रिश्ते को अदालत ने जबरन जोड़ने से इनकार कर दिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यदि पत्नी को ससुराल में अपनी सुरक्षा और सम्मान को लेकर उचित आशंका हो, तो उसे पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि वैवाहिक संबंध केवल कानूनी अधिकार का विषय नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सम्मान और सुरक्षित माहौल पर टिके होते हैं। यदि इनका आधार खत्म हो जाए तो अदालत किसी महिला को पति के साथ रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।जान का खतरा जैसे गंभीर आरोपअदालत के समक्ष पति का कहना था कि पत्नी बिना किसी ठोस का...