धनबाद, मार्च 9 -- गोविंदपुर, प्रतिनिधि। कुम्हारडीह रोड गोविंदपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को प्रवचन करते हुए कथा व्यास सुरेंद्र हरिदास जी महाराज ने कहा कि आज माता-पिता स्वयं शास्त्रों के विरुद्ध आचरण करते हैं, लेकिन अपेक्षा करते हैं कि उनकी संतान धर्मपरायण, संस्कारी और सफल बने। जैसे शास्त्रों में कहा गया है कि बाढ़े पुत पिता के धर्मे, खेती उपजे अपने कर्मे। अर्थात जैसे खेती अपने परिश्रम से लहलहाती है, वैसे ही संतान अपने माता-पिता के धर्म और कर्मों से आगे बढ़ती है। माता-पिता स्वयं मदिरापान, मांसाहार और अशोभनीय व्यवहार में लिप्त रहते हैं, परंतु चाहते हैं कि उनका पुत्र या पुत्री आदर्श, धर्मात्मा और सफल बने। जब तक जीवन में धर्म अर्थात सदाचार और कर्तव्य बोध को स्थान नहीं दिया जाएगा, तब तक केवल भौतिक समृद्धि परिवार को एक न...