प्रयागराज, अप्रैल 30 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि जब तक वैज्ञानिक रूप से यह साबित न हो जाए कि बरामद मांस वास्तव में गोमांस है, तब तक वाहन को जब्त करना पूरी तरह अवैध और मनमाना है। न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार की कार्यवाही को दोषपूर्ण माना और याचिकाकर्ता को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए सरकार पर 2 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। बागपत के मो चांद की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप जैन ने कहा कि बिना किसी अधिकृत प्रयोगशाला की पुष्टि के केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति की आजीविका के साधन को छीनना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है。 यह भी पढ़ें- 3 दिन में छोड़ें गाड़ी और दें 2 लाख का हर्जाना, गोमांस का दावा साबित न हो प...