किशनगंज, मई 16 -- किशनगंज। संवाददाता उस रात मुझे लगा था कि शायद मैं अपने बच्चे की पहली रोने की आवाज़ कभी नहीं सुन पाऊँगी " यह कहते हुए टेढ़ागाछ प्रखंड के सुदूर गांव चिल्हनियां की रुखसाना खातून (24) की आंखें भर आती हैं। गर्भावस्था के दौरान लगातार कमजोरी, चक्कर और सांस फूलने को उन्होंने सामान्य समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन एक रात अचानक उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि पूरा परिवार घबरा उठा। समय पर आशा कार्यकर्ता नसीमा खातून और एएनएम अर्चना कुमारी की तत्परता से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां जांच में गंभीर एनीमिया की पुष्टि हुई। इलाज और लगातार निगरानी के बाद सुरक्षित प्रसव संभव हो सका। भारत-नेपाल सीमा से सटे टेढ़ागाछ प्रखंड के गांव चिल्हनियां में रहने वाली रुखसाना खातून का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। पति बाहर रहकर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, घर में बूढ़...