नई दिल्ली, फरवरी 28 -- संगत से ही संसार बनता-संवरता है। यदि बच्चे को शुरू से सही संगत मिल जाए, तो वह सही राह पकड़ लेता है। बच्चों को सही परिवेश देने के लिए ही कर्नाटक के गांव सजीपामुड़ा से एक बहुत सामान्य परिवार मैसूर दर्शन के लिए आया था। वही मैसूर, जिसे महलों का शहर भी कहा जाता है। वहां सबसे चर्चित महल में राज परिवार के लोग रहते थे। देश तो आजाद होकर लोकतांत्रिक हो गया था, पर राजसी शान कहीं-कहीं बची हुई थी। भारतीय और यूरोपीय शैली का वह विशाल महल उस शाम कुछ ज्यादा चमक रहा था। देखने वालों का हुजूम उमड़ रहा था। हवा में रजनीगंधा व मोगरे की खुशबू हावी थी। संयोग से शनिवार था, तो राजसी बैंड का खास संगीत प्रदर्शन भी शुरू हो गया था। संगीत की गूंज होते ही कड़-कड़ झंकृत हो उठा। महल की दीवारें जाग उठीं और बगीचे के फूल कुछ ज्यादा ही मुस्कराने लगे। पलक...
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