नई दिल्ली, जून 27 -- यह कहानी है साल 1925 की। अक्टूबर का महीना था और शरद ऋतु की हल्की ठंड ने दस्तक दे दी थी। यूरोप के बाल्कन इलाके में, जहां ग्रीस (यूनान) और बुल्गारिया की सीमाएं आपस में मिलती थीं, वहां हवा में एक अजीब सी बेचैनी और तनाव घुला हुआ था। नक्शे पर खिंची एक लकीर के दोनों तरफ दो देशों के फौजी बूटों की आवाजें गूंज रही थीं। दोनों देशों के बीच पहले से ही कई जंगें हो चुकी थीं, इसलिए सीमाओं पर तैनात सैनिक एक-दूसरे को ऐसे देखते थे जैसे कोई भी छोटी सी हरकत बारूद के ढेर में माचिस लगा देगी। लेकिन इतिहास की क्रूर विडंबना देखिए- इस बारूद के ढेर पर माचिस किसी तानाशाह के भाषण ने नहीं, बल्कि चार पैरों वाले एक बेकसूर, आवारा कुत्ते ने लगाई। आइए चलते हैं उस खूनी और अजीबोगरीब दास्तान के सफर पर, जिसे इतिहास "द वॉर ऑफ द स्ट्रे डॉग" या "पेट्रिच का सं...