दिल्ली, मार्च 27 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि जन्म पत्री को किसी की जन्मतिथि का वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता है। एक मामले मे कोर्ट ने 13 साल पुराने किडनैपिंग और रेप के मामले में आरोपी की बरी होने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है। इस मामले में राज्य सरकार ने निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अब कोर्ट ने आरोपी को राहत दी है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंदर जुडेजा और जस्टिस नवीन चावला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। उन्होंने कहा कि पीड़िता की उम्र इस तरह के मामलों में बुनियादी आधार होती है, जिसे अविश्वसनीय दस्तावेजों के सहारे साबित नहीं किया जा सकता है।राज्य सरकार ने दी थी हाई कोर्ट में चुनौती कोर्ट ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी जच्चा-बच्चा सुरक्षा कार्ड भी जन्मतिथि क...