वाराणसी, सितम्बर 1 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, चार सितंबर को लगभग वैसे ही ग्रहयोग बनेंगे, जैसे द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म के समय बने थे। इसमें सबसे मुख्य बात चंद्रमा का अपनी उच्च राशि वृष में गोचर करना है। जन्माष्टमी पर सर्वार्थसिद्ध और हर्षण योग भी बनेंगे। इन योगों का विशेष प्रभाव माना गया है। अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र भी पर्याप्त समय तक रहेगा। हालांकि रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति मध्यरात्रि से कुछ समय पूर्व हो जाएगी। गत वर्ष की भांति इस बार भी शैव, वैष्णव एवं स्मार्त एक ही दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाएंगे। जो लोग रोहिणी नक्षत्र के मान को अधिक महत्व देते हैं, उन्हें भी चार सितंबर को ही यह उत्सव मनाने की सलाह दी गई है। ज्योतिषाचार्य पं. वेदमूर्ति शास्त्री के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 03 स...