जनता का दबा आक्रोश निकल रहा
नई दिल्ली, जून 1 -- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद जो कुछ हो रहा है, उसके गहरे अर्थ हैं। सत्ता से जैसे ही तृणमूल कांग्रेस बेदखल हुई, उसके नेताओं को जहां-तहां लोग आड़े हाथ लेने लगे। यह तृणमूल नेताओं के प्रति लोगों का दबा हुआ असंतोष और आक्रोश है, जो अब सामने आ रहा है। वास्तव में, लोग अब राहत का अनुभव कर रहे हैं और उन्हें लग रहा है कि इस चुनाव में एक ऐसे शासन की विदाई हुई है, जो उनकी हितैषी कतई नहीं थी। कहने का अर्थ यह है कि तृणमूल नेता अपनी कथनी का फल भोग रहे हैं। हालांकि, हिंसा को किसी भी स्थिति में जायज नहीं कहा जा सकता, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि आखिर लोग नाराज क्यों हैं? आखिर क्यों वे नेताओं से हाथापाई कर रहे हैं? बेहतर यही होगा कि तृणमूल के नेतागण अपने गिरेबां में झांके और जनता का भरोसा फिर से जीतने का प्रयास करें। इसके लि...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.