रांची, मार्च 16 -- रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग की ओर से 'झारखंड में जनजातीय उत्थान: नीति, संस्कृति और सतत विकास के समन्वय से विकसित भारत 2047' विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत सोमवार को हुई। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लेकर जनजातीय विकास, सांस्कृतिक पहचान और सतत विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। मुख्य वक्ता विश्वभारती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो बिद्युत चक्रवर्ती ने कहा कि जनजातीय समाज के विकास के लिए समावेशी शासन व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकास की नीतियों में जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संरचना को शामिल किए बिना वास्तविक विकास ...