रांची, जून 2 -- रांची, वरीय संवाददाता। न तो सरना-सनातन एक है और न ही सरना-ईसाई एक मां की संतान। यह बात केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने मंगलवार को प्रेस क्लब में कही। प्रेस वार्ता में उन्होंने ने कहा, आदिवासी वनवासी नहीं हैं। इसलिए 2026-27 जनगणना में धर्म कॉलम में सरना धर्म अंकित हो। बिरसा वाहिनी फाउंडेशन के संस्थापक प्रिया मुंडा ने कहा, 10 राज्यों में 5वीं अनुसूची क्षेत्र लागू है। वहां के 13 जिलों में पेसा कानून लागू है। लेकिन आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन उनकी संस्कृति को बचा नहीं पा रहे। समिति की महिला मोर्चा अध्यक्ष एंजेल लकड़ा ने भी अपनी बात रखी। यह भी पढ़ें- राष्ट्रीय सरना धर्मसम्मेलन में 28 को जुटेंगे आदिवासी मौके पर फाउंडेशन के निदेशक विजय मुंडा, आदिवासी विकास एकता मंच महुआटांड़ के अध्यक्ष मंगलदेव नगेसिया, संरक्षक वि...